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अंजनी कुमार शर्मा 'अंकित'

Abstract

4.5  

अंजनी कुमार शर्मा 'अंकित'

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सिया रघुवर आए अवध नगरी

सिया रघुवर आए अवध नगरी

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सिया-रघुवर आये अवध नगरी.....

आज चमकै बिजुरिया औ बरसै बदरी।

सिया............।


ह्वै प्रसन्न जन नाचै-गावैं।

रघुवर जी के दर्शन पावैं।

आज जगमग ज्योति जलै सगरी.....

सिया...........।


कौशल्या, सुमित्रादि महतारी।

बरसत नयन निहारि-निहारी।

सब अवध निवासी बुहारै डगरी.....

सिया..............।

लक्ष्मण भैया संग हैं आये।

भाल तिलक पीत वसन सुहाए।

नारि अपलक देखै खड़ी ह्वै बगरी.....

सिया..........।


सोने की थाल में सजी आरती।

चदन, कुंकुम, नेवैध, मालती।

पावन गंगा जल से भरी है गगरी.....

सिया.............।


हनुमत लाल जयघोष लगावै।

भाई भरत अक्षत बरसावै।

देखै प्रभु को मन मा हुलास भरी.....

सिया............।


कंचन मुकुट राम के साजै।

वाम अंग मात सिया विराजै।

अब राम पताका अवध मा लहरी....

सिया रघुवर आये अवध नगरी।



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