STORYMIRROR

Seema Saxena

Romance

4  

Seema Saxena

Romance

सिर्फ तुम हो

सिर्फ तुम हो

1 min
409

कितने सारे अनुभव 

कितनी सारी स्मृतियाँ

मन में उमड़ती घुमड़ती रहती हैं 

मैं तुम्हें याद नहीं करती 

पर रहते हो हर वक्त यादों में

मैं सुनती नहीं अपनी धड़कनें 

फिर भी कहती रहती हैं तुम्हें ही


डर जाती हूँ अक्सर 

इतनी हिम्मत होते हुए भी 

बिखर जाती हूँ मैं 

भटकती नहीं हूँ कभी 

रोते रोते धुंधला जाता है सब कुछ 

और हो जाती हूँ इतनी पाक साफ 


कि लगता ही नहीं कि मेरा शरीर भी बचा है 

सिर्फ आत्मा रह गयी है 

जो प्रेम से सराबोर है 

रंग में रंगी हुई है 

किसी आनंद के सागर में गोते लगा रही है 


सारे दुख सारे कष्ट 

कहीं खो गए हैं 

सिर्फ बचा है तो सुख 

खुशी और मुस्कान 

हाँ प्रिय यही तो सच है मेरा 

और रहेगा हमेशा 

जन्म जन्मांतर तक


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance