STORYMIRROR

Divine Poet

Romance

4  

Divine Poet

Romance

बेख़बर वो जवानी कोई

बेख़बर वो जवानी कोई

1 min
333

तैरती है आँखों में अक्सर 

एक तस्वीर पुरानी कोई 

धुंधला सा है चेहरा ,लेकिन 

लगती है दीवानी कोई 

करती है सवाल मुझसे 

जिसका कोई जवाब नहीं 

दिल के क़रीब तो है लेकिन 

भूला हुआ सा ख़ाब कोई 

जो मुक्कम्मल ना होगी शायद

आधी अधूरी कहानी कोई 

तलाश बेचैन कर जाती है 

जैसे लम्हों की मनमानी कोई 

तैरती है आँखों में अक्सर 

एक तस्वीर पुरानी कोई 

जैसे लौट के आइ हो फिर से 

बेख़बर वो जवानी कोई ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance