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Divine Poet

Abstract Drama Romance

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Divine Poet

Abstract Drama Romance

के राब्ता है तेरी हर बात से हमें

के राब्ता है तेरी हर बात से हमें

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रोशन है अंधेरा कोना दिल का 

कुछ ख़ुशमिज़ाज ग़मों के होने से

और मायूस नहीं ये ज़िंदगी भी 

तन्हाई में पलकें भिगोने से 


नहीं तक़दीर में लिखा, साथ तो क्या 

क्यूँ रुके हम हसरत सजोने से 

बड़ी देर बाद आइ है रौनक़ ये 

जो मिला उसी में खुद को डूबोने से

 

के राब्ता है तेरी हर बात से हमें 

फिर चाहे वो, दर्द हो या राहत।


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