STORYMIRROR

Divine Poet

Inspirational

4  

Divine Poet

Inspirational

इंसानियत का है यही उसूल

इंसानियत का है यही उसूल

1 min
339

किसी का साथ मिले ना मिले 

किसी का साथ देना ज़रूर 

ये ज़िंदगी है, बेरहम कभी 

और कभी है बेपनाह मक़बूल 


के तन्हा है सब यहाँ लेकिन 

तन्हाई नहीं है एक ही वजूद 

रोते हुए को हँसाना भी यहाँ 

कभी कभी बन जाए क़सूर 


फिर भी, कोशिश करते रहे 

इंसानियत का है यही उसूल 

कि किसी के कोई काम जो आए 

ख़ुदा का ही है वो रूप।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational