STORYMIRROR

Chitra Chellani

Romance

4  

Chitra Chellani

Romance

सिलवटें

सिलवटें

1 min
251

ये उजली दूधिया किरणे, शोर कितना मचाती हैं 

सहेजें किस तरह तुमको, सिलवटें हार जाती हैं 


मोती जो गढ़ती आँखों में मेरी तन्हा रातें 

काँच बना देती हैं उनको भोर की ये सौगातें 

तेरे रंगी स्वप्न महज़ अंधियारों में पलते हैं 

झाँक झरोखों से आते ये अंशु मुझे खलते हैं 


बिखर जाते सभी मोती, रश्मियाँ मार जाती हैं 

सहेजें किस तरह तुमको, सिलवटें हार जाती हैं 


फूल गुलाबों वाले भी ना मुझको लगें ज़रूरी 

भोर तलक तू महके मुझमें बन करके कस्तूरी 

तेरे किस्सों से महकाया मैंने खूब बिछौना 

बैरन पुरवाई ने तोड़ा मेरा स्वप्न सलोना 


रातरानी की गुल्में भी, बिखर हर बार जाती हैं 

सहेजें किस तरह तुमको, सिलवटें हार जाती हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance