STORYMIRROR

Sushmita Singh

Romance

4  

Sushmita Singh

Romance

इश्क

इश्क

1 min
367

ये इश्क अजब सी चीज़ है यारों

अजब नज़ारे दिखलाता है

किसी हँसते को कभी रुलाता है

कभी हंसने की वजह बन जाता है


कभी सूखे की बारिश है वो

धरती पर उपजते फूलों सी

कभी बादल की बिजली है वो

कभी जोर की कभी हल्की सी


कभी पतझड़ का मौसम है

कभी पेड़ों की है छाँव

कभी नहरो पर वो बाँध बनीं

कभी नदियों की वो नाँव


कभी पार करें उसूलो को

कहे डर के जीना नहीं हुजूर

कोई माने हर रोक को

सब छोड़े किस्मत पर जो हो मंजूर


कभी रोक में पनपे चाहत बनकर

दिल में मंदिर बन जाता है

बिन पाए अपने मंजिल को

उस मंजिल को ख़ुदा बनाता है


कभी पाकर उस मंजिल को ही

जोग की प्यास बुझाता है

नाम करके चाहत अपनी उसके

खुद भी उसका हो जाता है


ये प्यार ज़माने का अजब है यारों

ज़माना इस पर चलता है

पर मिलने लगे सच्ची मोहब्बत तो

ज़माना सारा जलता है


ये कैसा इश्क है जो ज़माने में

होत अलग कहलाए

ज़माना कहे खुद की,

तब भी ये अपनी ही बात कहाए।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance