STORYMIRROR

S Ram Verma

Romance

3  

S Ram Verma

Romance

सिहरना प्रेम में !

सिहरना प्रेम में !

1 min
218


तुम्हारी आँखों का स्पर्श 

लिपटता है मेरी देह से 

तब मैं काँप जाती हूँ 

फिर सोचती हूँ मैं 

कितना सहज होता है 

सिहरना प्रेम में जैसे 

गर्मी की अलसायी 

दोपहरी में थककर

लेटी नदी पर दरख्तों 

ने साज़िश रच कर 

एक किरण और मुट्ठी

भर हवा बिखेर दी हो 

फिर देखो जादू नदी का  

और सुनो कल-कल बहने 

की उसकी सुमधुर आवाज़ !



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance