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V. Aaradhyaa

Tragedy

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V. Aaradhyaa

Tragedy

शज़र अब ठूँठ बन गया

शज़र अब ठूँठ बन गया

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आज कुछ लेखा जोखा जो ,

करने बैठे तो दिल टूट गया !


इस जीवन की आपाधापी के, 

संघर्ष में बहुत कुछ छूट गया !


आज जो गौर से चेहरा देखा ,

मेरा आईना मुझसे रूठ गया !


शजर को सींचते रहे उम्र भर ,

पर वो भी एक दिन ठूँठ गया !


बनें सिकंदर नाज़ किया खुद ,

जिस पर वो भाग्य ही फूट गया !


अब तो क्या सहेज़े क्या संभालें,

महामारी से घरबार लूट गया !



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