।।शिक्षक।।
।।शिक्षक।।
मन के सूने मंदिर में, जो ज्ञान का दीप जलाता है।
दुनिया का दे तत्व ज्ञान जो, शिक्षक वह कहलाता है।
नित नित नमन करो शिक्षक को, रोशन जीवन को करता।
जीवन के इस अंधकार में, उजाला ज्ञान का जो करता।
हर संशय को दूर करके, जो जीवन सरस बनाता है।
दुनिया का दे तत्व ज्ञान जो, शिक्षक वह कहलाता है।
निश दिन हमको सरस भाव से, ज्ञान का पाठ पढ़ाता है।
अंधेरे की काल कोठारी से, उजाले में हमको लाता है।
जीवन रूपी इस पुस्तक का, हर शब्द का ज्ञान कराता है।
दुनिया का दे तत्व ज्ञान जो, शिक्षक वह कहलाता है।
बनाता है जीवन को जो, सुंदर सुमन सुगंधित सा।
मन में दृढ़ता भर देता है, मन हो जाता है गर्वित सा।
जीवन रूपी इस कचड़े में, को कमल पुष्प खिलाता है।
दुनिया का दे तत्व ज्ञान जो, शिक्षक वह कहलाता है।
शिक्षक दिवस की बेला है, गुरु को नमन करो सारे।
लेकर के आशीष गुरु का, बन जाओ दुनिया के प्यारे।
देकर शिक्षा ज्ञान शिष्य को, काबिल हमें बनाता है।
दुनिया का दे तत्व ज्ञान जो, शिक्षक वह कहलाता है।
