STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Tragedy Inspirational

4  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Tragedy Inspirational

"शिक्षा-संस्कार"

"शिक्षा-संस्कार"

1 min
363

जिस मनुष्य के पास होते है, सही संस्कार

वही सीखते है, यहां पर शिक्षा से शिष्टाचार


बिना संस्कार की शिक्षा होती है, बहुत बेकार

इससे उपजते है, यहां पर दैत्य, दानव हजार


पर साखी आजकल शिक्षा हो गई, व्यापार

फिर कैसे आएंगे, हमारे बच्चों में संस्कार


माना आधुनिक शिक्षा का जरूरी है, व्यवहार

पर न भूलो इसके पीछे आप अपने संस्कार


वही होता है, इस दुनिया का बगीचा गुलजार

जिसमें बहती है, पवित्र संस्कार शिक्षा बयार


बाकी यहां पर क्या काम की वो शिक्षा, यार

जो खुद के लिए ही बने, आत्मघाती हथियार


ये शिक्षा तो इस दुनिया में ऐसा है, किरदार

जो जानवरों को करना सीखा देती है, प्यार


संस्कार तोड़े, उस शिक्षा का करो, बहिष्कार

बड़ो का अनादर करे, वो शिक्षा नही, विकार


जो नम्रता सिखाये, सुधारे आचार-विचार

असल मे वो, शिक्षा जो पशुता करे, लाचार


आपके पास कितना भरा पड़ा, ज्ञान भंडार

गर न सीखी मानवता, वो आपका कारागार


सच्ची शिक्षा वो है, जो बनाये हमे ईमानदार

दे हमको ऐसे संस्कार, कर सके परोपकार


जो बना दे, हमें सूर्य जैसा, पवित्र निर्विकार

मिटाये, घट अंधकार, वो शिक्षा करे, स्वीकार



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama