Sahil Hindustaani
Romance
क़ालीन मख़मली मेरा आज राख़ हो गया
तेरा मुलायम जिस्म जो शबिस्तां में आ गया!
ग़ज़ल
अश'आर
समाज
शायरियां
तन्हाई में
कहता हूँ
रश्क़
शायरी - 1
शायरी
मेरी तन्हाइयां तुम्हारा इन्तज़ार करती हैं ख्वाबों में ही सही मुक्तसर मुलाकात करती हैं। मेरी तन्हाइयां तुम्हारा इन्तज़ार करती हैं ख्वाबों में ही सही मुक्तसर मुलाकात ...
तू कल का वादा करके आज ना आती तो मैं शायद चुप रहता। तू कल का वादा करके आज ना आती तो मैं शायद चुप रहता।
सावन की तीज में मेंहदी में मिला के, नाम तुम्हारा ही अपने हाँथों पे रचाऊँगी। सावन की तीज में मेंहदी में मिला के, नाम तुम्हारा ही अपने हाँथों पे रचाऊ...
ईश को याद करते जुड़ेंगे जब हाथ दोनों मन मंदिर में प्रियवर मेरी ही मूरत पाओगे। ईश को याद करते जुड़ेंगे जब हाथ दोनों मन मंदिर में प्रियवर मेरी ही मूरत पाओगे।
अब तो बह रही है चारों ओर से खून की नदियाँ इसे सूखा दे वो धूप की बारिश जानें कब होगी। अब तो बह रही है चारों ओर से खून की नदियाँ इसे सूखा दे वो धूप की बारिश जानें ...
तुम्हारे दिल की बेचैनी को, अपने नाम करती हूँ! सही सुना है तुमने हाँ, मैं तुमसे प्यार करती हूँ तुम्हारे दिल की बेचैनी को, अपने नाम करती हूँ! सही सुना है तुमने हाँ, मैं तुमस...
आदम और हव्वा की तरह . सारी सृष्टि आलिंगन करती सी! आदम और हव्वा की तरह . सारी सृष्टि आलिंगन करती सी!
यह रात लंबी और लंबी हो उतनी जितनी हमारे बीच अब ख़ामोशी है। यह रात लंबी और लंबी हो उतनी जितनी हमारे बीच अब ख़ामोशी है।
हां, लिखना है मुझे भी प्रेम, कहनी है तुमसे अपने दिल की बात। हां, लिखना है मुझे भी प्रेम, कहनी है तुमसे अपने दिल की बात।
कितना बोझ है एक आजादी के खयाल भर न होने से। कितना बोझ है एक आजादी के खयाल भर न होने से।
बदल चुकी है उष्म लू शीतल पुरवाई में कूक रही है कोयल मधुगीत रिमझिम अमराई में ! बदल चुकी है उष्म लू शीतल पुरवाई में कूक रही है कोयल मधुगीत रिमझिम अमर...
ये जश्न है अपने जीवन का ऊंची नीची लहरों पे माझी, ये जश्न है अपने जीवन का ऊंची नीची लहरों पे माझी,
पहचान के कुछ हल्के अंश दोनों के दरमियां रहने तो दो। पहचान के कुछ हल्के अंश दोनों के दरमियां रहने तो दो।
गुरुर तू तिश्नगी मार देगी जो तू ना मिली, तेरे सजदे में सर है झुका मेरा खुदा तू। गुरुर तू तिश्नगी मार देगी जो तू ना मिली, तेरे सजदे में सर है झुका मेरा खुदा त...
ऐसा मेरा अपना मेरा जिगर मेरा ख़ास जो थाम कर क़लम बिख़रे अपने ज़ज़्बात ऐसा मेरा अपना मेरा जिगर मेरा ख़ास जो थाम कर क़लम बिख़रे अपने ज़ज़्बात
चांद अपनी प्रियतमा की खोज में, दिन के नये सफर पर चल दिया। चांद अपनी प्रियतमा की खोज में, दिन के नये सफर पर चल दिया।
हर जगह पाओगे खुद को मेरी बांहों में। हर जगह पाओगे खुद को मेरी बांहों में।
एक भरी पूरी मांग से कुमकुम का नाता ही टूट गया। एक भरी पूरी मांग से कुमकुम का नाता ही टूट गया।
मन का द्वार मैं देखूं हर पल प्रीतम कब आओगे किया जो वादा मिलने का भूल तो नहीं जाओगे। मन का द्वार मैं देखूं हर पल प्रीतम कब आओगे किया जो वादा मिलने का भूल तो नहीं ...
क्या है?.....एक समर्पण भावना, तुझे खोकर भी पा लूंगी, जो मिल जाए तेरा साथ। क्या है?.....एक समर्पण भावना, तुझे खोकर भी पा लूंगी, जो मिल जाए तेरा साथ।