शान्ति स्थापना में नारी
शान्ति स्थापना में नारी
विश्व जननी सदा ही,
चाहती है शांति यहाँ,
न युद्ध की विभीषिका,
न भीषण क्रांति यहाँ।
क्या उसे नही प्यारा,
प्राण बाशिंदों का?
क्या उसे नही प्यारा,
प्राण परिंदों का?
क्षेत्र कोई बाकी नही,
महिलाएं जिसमें साथी नहीं,
वो दीपक भला कैसे जले?
जिसमें दीप पर बाती नहीं।
जननी तुम्हारे शान्ति प्रयास को नमन,
तुम्हारी क्षमता तुम्हारे एहसास को नमन,
माउंट एवरेस्ट से भी ऊँचे तुम्हारे हौसलें,
दिव्य ज्योति तुम्हारे प्रकाश को नमन।
भूल न पाएगा जग,
जननी सकल प्रयास को,
सोचना होगा हमें अब,
हो रहे नारी के उपहास को।
