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Bhavna Thaker

Tragedy

3  

Bhavna Thaker

Tragedy

शान ए तिरंगा

शान ए तिरंगा

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आई होली लाई कितनी 

यादों की पुरवाई 

तुम क्या रुठे फागुन रुठा 

टेसू के रंग फ़िके

बेरंगी है सारे मौसम 

रंग ना कोई भावे

सुहागिन सब खेल रही

मैं देखूँ दूर खड़ी ही


कितने हसीं थे सारे मौसम

यादों में अब रह गये

लाल उदासीन 

नीले ग़म है

हरी चूड़ियाँ रोएँ 

लोचन मांहि खेले

तन चिथड़े मेरे शहीद के

मेरी पुतलीयों को घेरे 


ठहर गये मेरे सारे लम्हें

शान ए तिरंगा मेरे

होली दीवाली चली गई

संग तुम्हारे प्यारे

झोली में मेरी पड़े हुए है

अब आँसू के ठेले 


जला दिये सुख सारे अपने 

माँ वतन की साँसें 

कभी ना रुकने पाएँ 

ज़िंदगी ही अब ठिठक गई

ख़ुशियों की दहलीज़ पे

कैसा फागुन, कैसी होली 


बेरंगी बेनूर हर लम्हें

शहीद की दुल्हन के अब तो 

सारे दिन है एक से।



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