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Anu Gangwal

Inspirational Others


4.0  

Anu Gangwal

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सफ़रनामा

सफ़रनामा

1 min 179 1 min 179

मुसाफिर हूँ चलना मेरा काम 

हर दिन निकलती हूँ

मंज़िल ढूंढने

वो कभी दिखती है

कभी ओझल हो जाती है

जाने क्यों खेलती है

आंख मिचौली मुझसे

लेती है इम्तिहान हज़ार

देखना चाहती है मेरा जज़्बा

हर शाम थक कर लौटती हूँ मैं

पर हर सुबह निकल

पड़ती हूँ

मंज़िल को पाने के लिए

खुद को आजमाने के लिए

खुद का नया आसमां ढूंढने के लिए

क्या करूँ ज़िद्दी हूँ नासमझ नहीं

चलना जानती हूँ रुकना नहीं

जानती हूँ मुसाफ़िर हूँ

मंज़िल पाने के बाद ही लूंगी दम



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