सड़क का भिखारी
सड़क का भिखारी
सड़क का भिखारी क्या चाहता है ?
सड़क के किनारे बैठे बैठे
बस सोचता रहता है...
और लाखों लाखों की गाड़ियां
गुजर जाती है उसके पास से !
भिखारी बस बैठा रहता है,
गाड़ियों को आते-जाते देखा करता है !
फिर शाम होती है फिर सुबह होती है
यही क्रम चलता रहता है
सड़क का भिखारी
भूखा-प्यासा सड़क के
उसी किनारे पड़ा रहता है !
जहां तक कोई गाड़ी वाला
पहुंच नहीं पाता फिर
क्यों बैठा रहता है वह वहां ?
समय बीतता चला जाता है
अब भी वह भिखारी सड़क के
उसी किनारे पड़ा रहता है
कोई भी उसके पास नहीं पहुंच पाता !
फिर एक दिन ऐसा आता है
सड़क का भिखारी सड़क के किनारे
पड़े पड़े दम तोड़ देता है !
आखिर क्यों फिर सड़क के
किनारे ही वह मर जाता है ?
सड़क का भिखारी था
सड़क पर ही मर गया !
दया का पात्र बन ना पाया
रोटी का टुकड़ा
मिल ना पाया
प्यास ने उसे
खूब सताया..
आँसू के घूंट पी लिए
जितनी जिंदगी थी जी लिए
ओ गाड़ी वाले !
जरा देखना इसे
सड़क के किनारे ,
है जो मरा पड़ा,
वह भी कभी एक धनवान था।
