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Javed Ali

Abstract Tragedy

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Javed Ali

Abstract Tragedy

सड़क का भिखारी

सड़क का भिखारी

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सड़क का भिखारी क्या चाहता है ?

सड़क के किनारे बैठे बैठे

बस सोचता रहता है...

और लाखों लाखों की गाड़ियां

गुजर जाती है उसके पास से !


भिखारी बस बैठा रहता है,

गाड़ियों को आते-जाते देखा करता है !

फिर शाम होती है फिर सुबह होती है

यही क्रम चलता रहता है

सड़क का भिखारी 


भूखा-प्यासा सड़क के

उसी किनारे पड़ा रहता है !

जहां तक कोई गाड़ी वाला

पहुंच नहीं पाता फिर 

क्यों बैठा रहता है वह वहां ?


समय बीतता चला जाता है

अब भी वह भिखारी सड़क के

उसी किनारे पड़ा रहता है

कोई भी उसके पास नहीं पहुंच पाता !


फिर एक दिन ऐसा आता है

सड़क का भिखारी सड़क के किनारे

पड़े पड़े दम तोड़ देता है !

आखिर क्यों फिर सड़क के

किनारे ही वह मर जाता है ?


सड़क का भिखारी था

सड़क पर ही मर गया !

दया का पात्र बन ना पाया

रोटी का टुकड़ा 

मिल ना पाया 


प्यास ने उसे

खूब सताया..

आँसू के घूंट पी लिए

जितनी जिंदगी थी जी लिए

ओ गाड़ी वाले !

जरा देखना इसे 

सड़क के किनारे ,

है जो मरा पड़ा,

वह भी कभी एक धनवान था।


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