Phool Singh
Crime Thriller Others
सच्चा मोती ढूँढे न, मिलता
जीवन जिंगुर की तरह टिमटिमाता हो
हठीलापन ज्यादा दिन न चलता
जल्द ही हकीकत से फिर सामना हो।
स्वयं विसर्जित कर दंभ को
जब अमृत का कुम्भ सामने हो
धरा फोड़ जैसे अंकुर निकलता
व्यक्तित्त्व ज्ञान से निखरता हो।
होली है
भीड़ अर्थात ल...
मेरे पुरूषोत्...
राम श्री राम
रामलला घर आएं
वर्तमान में स...
मजदूर
सत्य पथ
आस्था
गणतंत्र दिवस ...
कहां गया ये चैन और सुकून जो 200 करोड़ कमाने पर खुश हुए । कहां गया ये चैन और सुकून जो 200 करोड़ कमाने पर खुश हुए ।
तभी एक निर्भया मुक्त समाज का आगाज हो..... तभी एक निर्भया मुक्त समाज का आगाज हो.....
दिन ब दिन बढ़ते हादसे ये पैगाम दे रहे हैं आ गया है घोर कलियुग ये बता रहे हैं। दिन ब दिन बढ़ते हादसे ये पैगाम दे रहे हैं आ गया है घोर कलियुग ये बता रह...
देना नहीं कुछ इनको बस एक तरफा लेना सपनों के ये मधुर तिनके है। देना नहीं कुछ इनको बस एक तरफा लेना सपनों के ये मधुर तिनके है।
देश में सफेद झूठ की वाहवाही के लिए भेड़िए कविता सुना रहे हैं, देश में सफेद झूठ की वाहवाही के लिए भेड़िए कविता सुना रहे हैं,
मैं भी देखूं दुनिया सारी, मुझे भी प्यार पाना है। मैं भी देखूं दुनिया सारी, मुझे भी प्यार पाना है।
क्यूँ एक बेजान सा, खिलौना बना दिया उनने, बहुत डरावना ना था सब। क्यूँ एक बेजान सा, खिलौना बना दिया उनने, बहुत डरावना ना था सब।
है कोई यहां शाप तो नहीं गरीबी में जन्म लेना यहां, है ये कोई पाप तो नहीं। है कोई यहां शाप तो नहीं गरीबी में जन्म लेना यहां, है ये कोई पाप तो नहीं।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के अभियान से ही क्या समाज चल पाएगा ? बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के अभियान से ही क्या समाज चल पाएगा ?
सचमुच राजा वसंत,वर्षा ऋतुओं की रानी कह गए कबीर अपनी जुबानी ! सचमुच राजा वसंत,वर्षा ऋतुओं की रानी कह गए कबीर अपनी जुबानी !
क्या, नारी के प्रति लोगों का रवैया भी बदल रहा है ? क्या, नारी के प्रति लोगों का रवैया भी बदल रहा है ?
तोड़कर एक आशियाना, क्या अपना घर बसाएगा? तोड़कर एक आशियाना, क्या अपना घर बसाएगा?
दरिन्दगी भर गयी है खून में हैवान कर रहे अत्याचार... दरिन्दगी भर गयी है खून में हैवान कर रहे अत्याचार...
राजनीति की पिच पर न्याय कि गिल्ली उड़ाओ। राजनीति की पिच पर न्याय कि गिल्ली उड़ाओ।
हर शुभ कामों से था दूर मुझे रखा न मेरी कोई सखी न था कोई सखा, हर शुभ कामों से था दूर मुझे रखा न मेरी कोई सखी न था कोई सखा,
है दुआ रब से हो सलामत सब चल रहा है बुखार का मौसम है दुआ रब से हो सलामत सब चल रहा है बुखार का मौसम
समाज में कुछ घर ऐसे भी होते हैं, जहाँ भेडिये इंसानों की शक्ल में पाए जाते हैं। समाज में कुछ घर ऐसे भी होते हैं, जहाँ भेडिये इंसानों की शक्ल में पाए जाते है...
हम मर मिटे सच्चे इश्क की तलाश में अब कैसे जिएं। हम मर मिटे सच्चे इश्क की तलाश में अब कैसे जिएं।
अगर फिर आई लड़की के रूप में परी तो हर बार दूंगा मैं ऐसे ही बलि। अगर फिर आई लड़की के रूप में परी तो हर बार दूंगा मैं ऐसे ही बलि।
बिल्कुल थी गुलाब की तरह नाजुक और प्यारी। बिल्कुल थी गुलाब की तरह नाजुक और प्यारी।