Phool Singh
Crime Thriller Others
सच्चा मोती ढूँढे न, मिलता
जीवन जिंगुर की तरह टिमटिमाता हो
हठीलापन ज्यादा दिन न चलता
जल्द ही हकीकत से फिर सामना हो।
स्वयं विसर्जित कर दंभ को
जब अमृत का कुम्भ सामने हो
धरा फोड़ जैसे अंकुर निकलता
व्यक्तित्त्व ज्ञान से निखरता हो।
होली है
भीड़ अर्थात ल...
मेरे पुरूषोत्...
राम श्री राम
रामलला घर आएं
वर्तमान में स...
मजदूर
सत्य पथ
आस्था
गणतंत्र दिवस ...
ऊपर वाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं शायद उसको नहीं मालूम, ऊपर वाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं शायद उसको नहीं मालूम,
आज स्वयं से फिर प्रश्न हैं , क्या करें ऐसा रोकने के लिए इस अपराध को ? आज स्वयं से फिर प्रश्न हैं , क्या करें ऐसा रोकने के लिए इस अपराध को ?
कुल मिलाकर अब हमें भीड़ से अलग होना होगा अंधभक्त या चमचा का पट्टा उतार फेंकना होगा। कुल मिलाकर अब हमें भीड़ से अलग होना होगा अंधभक्त या चमचा का पट्टा उतार फेंकन...
सुनो अलग कहानी एक जिसे सुनकर सिहर उठे कई एक! सुनो अलग कहानी एक जिसे सुनकर सिहर उठे कई एक!
न जाने कितने चमकते चेहरों के नकाब उतर जाते हैं। न जाने कितने चमकते चेहरों के नकाब उतर जाते हैं।
त्याग की उस मूर्ति को नोचते हैं भेड़िए दामन को चीरते खरोचते हैं भेड़िए, त्याग की उस मूर्ति को नोचते हैं भेड़िए दामन को चीरते खरोचते हैं भेड़िए,
ये है जीवन का आधार अच्छे कर्म पर आगे बढ़ना बुरा कर्म पर पीछे हटना। ये है जीवन का आधार अच्छे कर्म पर आगे बढ़ना बुरा कर्म पर पीछे हटना।
इरादे भी इतने बुलंद थे कि कदमों में, भी पर्वत छुकाए बैठी हूं। इरादे भी इतने बुलंद थे कि कदमों में, भी पर्वत छुकाए बैठी हूं।
बड़े-बड़े लोगों से उसकी, जान पहचान क्यों है ? बड़े-बड़े लोगों से उसकी, जान पहचान क्यों है ?
तुम ही तो हो चाहत मेरी, आओ तुम्हें मैं अपनी मोहब्बत लिख दूँ। तुम ही तो हो चाहत मेरी, आओ तुम्हें मैं अपनी मोहब्बत लिख दूँ।
क्यों ना किसी का दिल पिघले, क्यों ना कोई राज उठाये ? क्यों ना किसी का दिल पिघले, क्यों ना कोई राज उठाये ?
भूल ना पाऊंगा मैं कभी भी ना तुमको, इंतजार करना, फिर मिलूंगा अगले जन्म में। भूल ना पाऊंगा मैं कभी भी ना तुमको, इंतजार करना, फिर मिलूंगा अगले जन्म में।
यहाँ अपने-अपने स्तर पर, हर क्षण घोटाले होते हैं। यहाँ अपने-अपने स्तर पर, हर क्षण घोटाले होते हैं।
यहां मानुष का हृदय हुआ इतना पाषाण। यहां मानुष का हृदय हुआ इतना पाषाण।
आओ आज से हम सब मिलकर करें प्रण, हम देंगे रिश्वत और ना ही लेंगे हम रिश्वत ! आओ आज से हम सब मिलकर करें प्रण, हम देंगे रिश्वत और ना ही लेंगे हम रिश्वत !
मुझमें बची कुछ धीमे-धीमे चलती साँसे... फिर यह सोशल मीडिया छीन लेता है, मुझमें बची कुछ धीमे-धीमे चलती साँसे... फिर यह सोशल मीडिया छीन लेता है,
करवाया जबरन गर्भपात तो धारा 312-315 सजा दिलवाना। करवाया जबरन गर्भपात तो धारा 312-315 सजा दिलवाना।
अब बस यही है मेरी आस किसी को ना हो व अहसास। अब बस यही है मेरी आस किसी को ना हो व अहसास।
तू साक्षात बिराजमान था तब भी, एक दुशासन पड़ रहा था भारी। तू साक्षात बिराजमान था तब भी, एक दुशासन पड़ रहा था भारी।
जैसे जल एक शहर गया उसका चेहरा बदल गया जैसे जल एक शहर गया उसका चेहरा बदल गया