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Phool Singh

Crime Thriller Others

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Phool Singh

Crime Thriller Others

सच्चा मोती

सच्चा मोती

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सच्चा मोती ढूँढे न, मिलता

जीवन जिंगुर की तरह टिमटिमाता हो 

हठीलापन ज्यादा दिन न चलता

जल्द ही हकीकत से फिर सामना हो।


स्वयं विसर्जित कर दंभ को

जब अमृत का कुम्भ सामने हो 

धरा फोड़ जैसे अंकुर निकलता

व्यक्तित्त्व ज्ञान से निखरता हो।


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