सच बनाम झूठ।
सच बनाम झूठ।
यही तो है सच्चाई की ताकत,
झूठ कितना भी लुभावना हो।
कितनी बार छल-कपट से ही,
सच्चाई को हराकर इठलाता।
बड़ी शान से सच को चिढ़ाता,
अंत में हमेशा सच्चाई जीतती।
झूठे का होता फिर से मुंह काला,
और सच्चे का होता बोलबाला।
