STORYMIRROR

Komal Kamble

Abstract Action Inspirational

4  

Komal Kamble

Abstract Action Inspirational

धर्म बिका बाजार में

धर्म बिका बाजार में

1 min
261

अधर्म का साथ देकर

धर्म को मिटा दिया

मानवता तब बिखर गई

जब धर्म बिका बाजार में


मानवता तब सूंली लटकी

उसे मजहबों में बांट दिया

टूकडों वाली सोच ने जब

अधर्म का साथ दिया


हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई

इन धर्मो में भेदभाव किया

ना भरा जब इससे मन भी

तो हाथों में हथियार लिया


टूकडों वाली यह सोच

क्या जाने धर्म होता क्या 

अधर्म को साथ है जिनका

क्या जाने वह मानवता का अर्थ है क्या।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract