STORYMIRROR

RAJNI SHARMA

Action Inspirational

4  

RAJNI SHARMA

Action Inspirational

बादलों का उन्माद

बादलों का उन्माद

1 min
253

नदी का गर्मी से वाष्प बनकर,

पवन के झोंकों संग उड़ना,

नील गगन के अंतर्मन में बसना,

बादल बन धरा पर बरसना।।


घुमड़ घुमड़ कर स्वर में गान,

घनघोर घटाओं का तिमिर,

गर्जना से उमड़ते हुए भाव,

काले अंबुद भरते उन्माद।।


कभी-कभी नीले मन भावन,

रिमझिम रिमझिम फुहार लाते,

छटा बिखेरें भर -भर सावन,

प्रियतम को भरमाया मेघा घन ।।


गर्मी में करें शीतल प्रदान,

वसुंधरा की सोंधी महक से,

खेत खलिहान में भरते जान,

हरियाली संपन्नता में है शान।।


बादल के छटने से गगन में,

बने सतरंगी इन्द्रधनुष तान,

उर से प्रफुल्लित हैं तरूवर,

आशीर्वाद जैसे वारीधर।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Action