STORYMIRROR

शशांक मिश्र भारती

Action

4  

शशांक मिश्र भारती

Action

सबकुछ कविता

सबकुछ कविता

1 min
2

प्रकृति में परिवर्तन
सूर्य का उगना
फिर डूब जाना
चिड़ियों का कलरव
नदी का बहना
किसी का देश के लिए
समर्पण 
कविता ही तो है।
झरने का बहकर
गिरकर भी कहना
आम का बौराना
अलसी का मटकना
चने का गरदन उचकाना
सुख सुविधा त्याग
जेल जाना देश हित 
कविता ही तो है।
मानव हृदय का
अनुभूतियों से भरना
दुर्दिन की पीड़ा का
घनीभूत होकर के
प्रसाद के आंसू बनना
अपने नौनिहालों छोडकर
आजादी के सपने
बुनना
कविता ही तो है।
चिड़िया की उड़ान
पतंग का आसमान में
एक सीमा तक उड़ना
निराला के हृदय से
सरोजस्मृति निकलना
जब लोग तलाशते हैं
भोग विलास
देश हित
लाठी गोली खाना
कविता ही तो है।
सृष्टि के आदि से
अन्त अनन्त तक
सूर्य-चन्द्र से
आगे और आगे
बढ़ते चले जाना
तन मन धन समर्पित
और क्या दूं का भाव
कविता ही तो है।
यहां से वहां
इस घर उस घर
कवि कल्पना कलम
अनुभूतियों का राग
नीरस से सरस
बीज का अंकुरण
हाव भाव ढाल
स्वतंत्रता सेनानी
बनना
कविता ही तो है।
बच्चे का प्रथम रुदन
तुतलाकर बोलना
नकल उतारना
आह से उपजा गान
वाल्मीकि या चन्द
सुभाष भगत बिस्मिल
हो जाना
जननी जन्मभूमिश्च को 
गौरवमय कर जाना
देश के लिए त्याग 
कविता ही तो है।
जी हां सब कविता ही है।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Action