STORYMIRROR

शशांक मिश्र भारती

Abstract

4.5  

शशांक मिश्र भारती

Abstract

होली है होली

होली है होली

1 min
21

होली के रंग
प्रेम के संग
तभी होली,
नीले पीले हरे
मिलकर हो एक
सही होली,
राग द्वेष और घृणा
भूले अपना रंग ढंग
सच की होली,
शान्ति का दूत
भूल जाए युद्ध रीति
मध्य में होली,
अपने अपनों से मिलें
भूलकर बहुत कुछ
सच्ची होली,
मिले मिलाए सबको
तन ही न मन मिले
यही होली,
प्रहृलाद की पीड़ा
कृष्ण की ब्रजलीला
समझ होली,
फाल्गुनी फाग रचे
आम्रमंजरी,होला
रंगोत्सव होली,
धर्म इतिहास रची
फिल्मी समाज बसी
रंगों की होली।
ढोल ढमार होल्यारे
रंग से रंग मिले
ऐसी है होली।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract