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शशांक मिश्र भारती

Abstract

4.5  

शशांक मिश्र भारती

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होली है होली

होली है होली

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होली के रंग
प्रेम के संग
तभी होली,
नीले पीले हरे
मिलकर हो एक
सही होली,
राग द्वेष और घृणा
भूले अपना रंग ढंग
सच की होली,
शान्ति का दूत
भूल जाए युद्ध रीति
मध्य में होली,
अपने अपनों से मिलें
भूलकर बहुत कुछ
सच्ची होली,
मिले मिलाए सबको
तन ही न मन मिले
यही होली,
प्रहृलाद की पीड़ा
कृष्ण की ब्रजलीला
समझ होली,
फाल्गुनी फाग रचे
आम्रमंजरी,होला
रंगोत्सव होली,
धर्म इतिहास रची
फिल्मी समाज बसी
रंगों की होली।
ढोल ढमार होल्यारे
रंग से रंग मिले
ऐसी है होली।


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