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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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हास्य - मोदी जी ग़लत बात है

हास्य - मोदी जी ग़लत बात है

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अभी-अभी यमराज ने मोदी जी को फोन लगाया 
आपरेशन सिंदूर के लिए हर्ष जताया,
अचानक वो हत्थे है उखड़ गया 
मोदी जी को भला-बुरा कहने लगा।
मोदी जी ने उससे प्यार से पूछा -
यमराज महोदय! आखिर आपको गुस्सा क्यों आया?
यमराज कहने लगा- गुस्सा करने वाला काम करेंगे जानबूझ कर हमें गुस्सा भी दिलायेंगे 
और फिर पूछेंगे कि हमें गुस्सा क्यों आया?
तो सुनिए! आपकी सेना ने आपरेशन सिंदूर किया 
सबके साथ हमने भी अच्छा मान लिया,
आपके लिए हमारे दिल में जो सम्मान था 
वो आज अचानक ही और भी बढ़ गया।
पर हमारे चेलों को आपके सैनिकों का 
असंवेदनशील व्यवहार हमारे चेलों को बहुत खल गया,
उन्होंने कब,कहाँ, किसको, कैसे मारा, 
किसी ने नहीं, तो हमने भी नहीं पूछा 
पर अपने चेलों का ये सवाल मुझे भी चुभ गया।
अजहर मसूद के परिवार को मार दिया 
कोई दस तो कोई चौदह कहता है,
जो भी है, सबको जन्नत नसीब हो गया
बस यही दोहरा मापदंड हमारे चेलों को खल गया।
आप तो मानोगे नहीं,
और मानोगे भी कैसे? आप तो जिद्दी हो 
मारते बाद में हो, पहले रुलाते हो।
पर आपकी सेना से यहीं पर एक बड़ा अपराध हो गया
अरे! अजहर को भी मार देते 
या फिर उसके परिवार में किसी को तो 
रोटी बनाने के लिए ही सही छोड़ देते।
तो आपका या आपकी सेना का क्या बिगड़ जाता?
आपकी सेना को इतना  निष्ठुर भी नहीं होना था 
कम से कम इतना तो सोचना ही चाहिए था 
कि बेचारे को रोटी बनाना भी नहीं आता,
या आपको और आपकी सेना का
इतनी संवेदना का भाव भी नहीं गुदगुदाता।
शायद आप सबकी समझ कमजोर हो गई है,
एक अदद विकेट लेने में कौन सी बड़ी मुश्किल थी। 
जरा देखिए! बेचारा कितना रो रहा है,
आपको और एक सौ चालीस करोड़ भारतीयों को 
भले ही यह लगता होगा
कि वह अपने परिजनों के मरने से दुखी हैं, 
पर मेरा विश्वास कीजिए, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।
वो बेचारा तो इसलिए रो रहा है 
अपने न मरने पर अफसोस कर रहा है।
वो बेचारा मासूम, भोलाभाला यह सोचकर रो रहा है 
कि अब वह आतंकवाद फैलाएगा
या रोटी बोटी का इंतजाम कर स्वयं चूल्हा जलायेगा
कच्चा पक्का पकाकर खाएगा या फिर भूखा मर जायेगा।
आपको मेरा एक मानवीय सुझाव है 
जिस पर तत्काल अमल कीजिए,
उसे भी प्यार से जन्नत भेज दीजिए।
और जब तक ऐसा नहीं करना है,
तब तक बेचारे के लिए कम से कम पेट भरने के लिए 
रोटी बोटी का नियमित इंतजाम करवा दीजिए।
नाश्ते का जुगाड़ वो खुद कर ही लेगा 
बेचारा किसी तरह भूखों मरने से बच जाएगा। 
तब तक आपको और आपकी सेना को भी 
उसे जन्नत भेजने के लिए भरपूर समय मिल जायेगा,
और मेरे चेलों के चेहरों पर फिर से मुस्कान आ जायेगा।

सुधीर श्रीवास्तव ( यमराज मित्र)


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