चौपाई छंद गीत
चौपाई छंद गीत
चौपाई छन्द गीत सुख-दुख तो हैं आते-जाते ****************************** सुख-दुख तो हैं आते-जाते, जीवन पथ संगीत सुनाते। समझ इसे हम सब कब पाते, बाद बहुत नाहक पछताते।। इसका जीवन खेल निराला, लगा नहीं है कोई ताला। करें नहीं जो गड़बड़ झाला, कब होता उसका मुँह काला।। जो इससे यारी कर पाते, मधुरिम राग सदा ही गाते। सुख-दुख तो है आते जाते, जीवन पथ संगीत सुनाते।। जो भी इसको दोष न देता, ईश्वर नैया उसकी खेता। सुख का जो है स्वागत करता, सदा नाम दुख के है डरता।। ऐसे प्राणी हैं पछताते, जीवन का रस कभी न पाते। सुख-दुख तो हैं आते जाते, जीवन पथ संगीत सुनाते।। चाहे जितनी कथा सुनाएँ, या फिर सुख-दुख में भरमाएंँ। या जीवन सुर-ताल बताएँ, आप व्यर्थ कहकर ठुकराएँ।। कड़वी लगती इसके बातें, मापदंड हम कब सह पाते। सुख-दुख तो हैं आते जाते, जीवन पथ संगीत सुनाते। मानो दोनों आप सहोदर, मान दीजिए समता सादर। नहीं आप बनिए अज्ञानी, जानो इसकी कथा पुरानी।। भेदभाव की नाहक बातें, नहीं कटेंगी दिन या रातें। सुख-दुख तो हैं आते जाते, जीवन पथ संगीत सुनाते।। बस अपना किरदार निभाओ, ईश्वर इच्छा मान बढ़ाओ। मिला आप जो भी अपनाओ, जीवन का आनंद उठाओ।। सुख में इतना क्यों इतराते, तनिक दुखों में घबरा जाते। सुख-दुख तो हैं आते जाते, जीवन पथ संगीत सुनाते।। सुधीर श्रीवास्तव
