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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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आधार बाला छंद

आधार बाला छंद

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आधार बाला छंद  :- 212-212-212-2 *********** धर्म  का देख  व्यापार ऐसा। चाहते हैं सभी आज पैसा।। खो रही  है धरा भाव देखो, आदमी हो गया आज कैसा।। खोजते आज अपने पराए। जो रहे  खूब  दूरी  बनाए।। ज़ख्म अपने भला क्यों कुरेदें, क्या यही आज तक सीख पाए।। मित्र  यमराज घर  आज आए। देख हमको तनिक मुस्कराए।। मौन से  आज  उनके  डरा मैं, प्रेम से चल दिए बिन बताए।। मानते  क्यों नहीं  बात प्यारे। सामने आ कहो तुम दुलारे।। हम नहीं है किसी की दया से, मान जाओ करो ना किनारे।। यार  हमको  नहीं  तुम  सताओ। नाज़ नखरे नहीं अब दिखाओ।। लोग कहते  नहीं  ठीक आदत, या चलो राज हमको बताओ।।     माँ नहीं तो भला कौन होगा। मान लो ये धरा हो वियोगा।। माँ कहे लाल मेरा निराला, लाल मेरा बना है उजाला।।              सुधीर श्रीवास्तव 


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