जीने के लिए
जीने के लिए
जीने के लिए *********** उम्मीदों की राह का मिटता सन्नाटा मुस्कान बिखेरती चाँदनी सपने दिखाती, दिल की धड़कन बेकाबू सी हो जाती है। तब मन में विश्वास जगाना पड़ता है अपने आप से तर्क-वितर्क करना पड़ता है, उम्मीदों को यथार्थ के धरातल पर उतारने का प्रयत्न भी करना पड़ता है। राह के काँटे खुद हटाता पड़ता है, सन्नाटे को चीरना पड़ता है, ऊहापोह से बचकर आगे बढ़ना पड़ता है धड़कनों पर काबू रखना पड़ता है। इन सबके लिए अपने आप से लड़ना पड़ता है। जीवन में विडंबनाएं बहुत हैं, यह बात अच्छे से समझना पड़ता है, आँसुओं को ताकत बनाकर हौसलों को पंख देना पड़ता है, जीवन जीने के लिए जाने क्या-क्या जतन करना पड़ता है और अकेले ही जूझते हुए आगे बढ़ना और जीतना पड़ता है। सुधीर श्रीवास्तव
