ग़ज़ल
ग़ज़ल
ग़ज़ल (बह्र:२२ २२ २२ २२) माना जीवन बड़ा सरल है। कुछ लोगों से बना गरल है।। अपने तो सब बेगाने हैं, इसका अब आज कहाँ हल है। जिस पर आज करो भरोसा, करता वही हमेशा छल है। अपने लक्ष्य में जान लगाता, होता आज वही सफल है। चुनाव जीताने के लिए ही, नेताओं के पास दल-बल है। कितना पाप करो तुम सुधीर, पवित्र होने को गंगाजल है। सुधीर श्रीवास्तव
