Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Sonam Kewat

Abstract Tragedy Action


4  

Sonam Kewat

Abstract Tragedy Action


परिवार में बटवारा

परिवार में बटवारा

1 min 281 1 min 281

गलत को सही बनाया गया 

कुछ इस तरह से विवाद बढ़ाया गया 

मजे ले रहे थे लेने वाले और 

एक परिवार में बटवारा करवाया गया 


बटवारा होने पर भी अब 

एक दूजे को सुकून मिलता कहां है 

बड़ा छोटों को इज्जत सिखाता है पर 

खुद का कुसूर निकलता कहां है 


बड़ा छोटों को इज्जत सिखाता है 

बड़ा बड़ाई का पाठ पढ़ाता है पर 

छोटा बोल पड़े बात पर तो कहते हैं 

छोटे को इज्जत करना आता कहां है 


एक ने जोश में खून किया 

दूसरे ने होश में कत्ल किया 

हां उसी परिवार का नाश हुआ 

जिसका लोगों ने कभी मिसाल दिया 


फैसला करने वाला ही यहां 

पक्षपात दिखाता है 

झूठा भी चिल्ला चिल्ला कर यहां 

सच्चे को चुप रहना सिखाता है


अब तुम ही समझ जाओ 

यहां आखिर कैसी मजबूरी है 

झगड़ों से तो कुछ मिला नहीं

सिर्फ आपस में बढ़ी दूरी है


गलती दोनों पक्ष से हुई होगी

ताली एक हाथ से बजती नहीं है 

कोई माफी मांगे और कोई माफ करे 

यहाँ जिंदगी फिर से मिलती नहीं है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Sonam Kewat

Similar hindi poem from Abstract