सवाल
सवाल
माँ के गर्भ से बेटी एक सवाल पूछे,
माँ तू आज पोषित कर रही है मुझे,
क्या हर पल जीवन रक्षक रहोगी माँ,
क्या भाई जैसा मुझे भी प्यार करोगी माँ,
मुझे भी जीवन का अधिकार दिलाओगी माँ,
मुझे हर पल प्रेम के आँचल में बैठाओगी माँ,
मुझे दरिन्दों से बचाओगी माँ,
रक्षक बन संग रहोगी माँ,
माँ ममत्व का आँचल मुझे दे देना,
खुशियों का संसार देना।।
माँ बोली,
मैं तो तेरी रक्षक हूँ,
आज से नहीं सदा से हूँ
तू मेरी ही परछाई हैं
तुझमें में ही मेरी दुनिया समायी हैं
तू हैं, तभी मैं हूँ,
तेरे बिन मैं कुछ न हूँ
ममत्व, प्रेम का आँचल,
यही तो है प्रेमांचल,
मैं तुझमें ही जीती हूँ,
सशक्तता तुझे देती हूं,
तुझे स्वयं से है जीतना,
फिर जीत पाएगी तू जग
जगमगा पाएगी वसुंधरा
यह धरा तो तेरे लिए है,
यह तेरा अस्तित्व धारण किये हैं
तुझमें ही है वह सब गुण,
जो मिटा सकता जन जन का अवगुण
यह मुझे तुझे सिखाना हैं
केवल तू ही तो मेरा खज़ाना हैं
तू मेरे अस्तित्व की पहचान है,
तू ही तो वसुधा की शान हैं
महकती तुझसे धरा ये सारी हैं
तू हर दुर्भाव पे भारी हैं
मैं जागूँ और तुझे जगाऊँ
प्रेम से तुझे सजाऊँ
बस जीवन सार्थक हो जाएगा
जब हर माँ में ये विवेक जाग जाएगा
सुरक्षित होगी तब हर बेटी,
जब माँ को जागना आएगा।।
