सैनिक की पत्नी का पत्र
सैनिक की पत्नी का पत्र
प्रियतम प्यारे
कहना चाहती हूँ तुमसे
दिले हालात अपने
तुम्हें पता है
गर मैं देखती हूँ
चमकती चाँदनी रात
उस चमकते चाँद में
तुम्हें ही पाती हूँ
दूर से दिखते बादलों में
बने अनेक चित्रों में
तुम्हारा मुख दर्पण झलकता है
बगीचे के आम की टहनियों से
गुजरने वाली हवा छूकर
मुझे तुम्हारा एहसास कराती है
घर के पीछे से गुजरती ट्रेन की आवाज़
तुम्हारे आने की आहट देती है
चाहकर भी एक पल
तुम्हें भूल न पाती हूँ
ये प्रेम की पाती लिख
तुम्हें अपने दिल की
हालत बताती हूँ
खेतों में तुम्हें हर रोज़
आते हुए निहारती हूँ
कभी तुम्हें नदी किनारे हँसता
तो कभी मेरे सिरहाने बैठा पाती हूँ
सब कुछ यहाँ हैं
पर तुम बिन कुछ नहीं मेरा
जीवन का हसीन ख़्वाब हो
मेरे हृदय की धड़कन हो
गर मेरी साँसो से गुजरती हवाएँ
तुम तक जाती हैं
तो उसमें अपना प्यार देना
अपने प्रेम की खुशबू
से उसे भिगोना
ख़त के जवाब में
आने की तारीख जरूर लिखना।

