सावन को बरसते देखा है
सावन को बरसते देखा है
सावन को बरसते देखा है
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खेतों में, खलियानों में,
सावन को बरसते देखा है ।
झर -झर झरती बूंदें मोती जैसी
पेड़ों के पत्तों पर चमकती चांदी जैसी
बीजों को पौधा बनते देखा है,
सावन को बरसते देखा है ।
धरती की भरती गोद
हंसों को नहाते देखा है,
सावन को बरसते देखा है ।
नदी, नाले, ताल -तलैया भरते उफान
सागर लेता हिलोर
आसमान में इंद्रधनुष बनते देखा है,
सावन को बरसते देखा है ।
गोरी की आंखों में मदिरा का नशा
मृदुल -मनोरम अमृत छलकाती बातें
काली नागिन सी चाल
सावन के प्यासे को तड़पते देखा है,
सावन को बरसते देखा है ।

