STORYMIRROR

Hardik Mahajan Hardik

Romance Tragedy

4  

Hardik Mahajan Hardik

Romance Tragedy

साथ तुम्हारे

साथ तुम्हारे

1 min
283

साथ तुम्हारे ना हूँ, मैं....

तो मुझे अधूरा लगता है ,

बिन तुम्हारे हर दिन,

मुझे सुना-सुना सा

लगता है,

जब मैं....किसी किनारे

पर होता हूँ....

कहीं दूर सफर में तब

मुझे बिन तुम्हारे होना,

अधूरा महसूस

होता है,

रात की खामोशियाँ मेरी

फिर सुबह जब

उठता हूँ ,

साथ तुम्हारे ना हूँ , मैं....

तो दिल मेरा सुनो बहुत

रोता है,

साथ तुम्हारे ना हूँ , मैं....

तो मुझे अधूरा लगता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance