साथ तुम्हारा
साथ तुम्हारा
ध्यान करूं नित नाम तुम्हारा,
दरस करुँ नित रूप तुम्हारा।
याद रहे नित ,किसी और को चाहूं,
पाकर नित साथ तुम्हारा।
कथनी- करनी का भेद न जाना,
रहनी -सहनी न एक सुधारा।
याद रहे नित आचरण सुधारुँ,
पाकर नित साथ तुम्हारा।
जीवन में आकर परिवार सुधारा,
जब से पाया है स्पर्श तुम्हारा।
याद रहे नित, तेरे ही गुण गाऊं,
पाकर नित साथ तुम्हारा।
प्रेम ने सब है तुम पर वारा,
"प्रेममय" कर दो जीवन हमारा।
याद रहे नित, तुझ में ही समाऊँ,
पाकर नित साथ तुम्हारा।

