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Shailaja Bhattad

Drama

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Shailaja Bhattad

Drama

सार्थक

सार्थक

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जब आप दुनिया में न रहकर,

दुनिया आप में रहने लगे।


तब न जीने का अर्थ रहता है,

न जीवन सार्थक होता हैI


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