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Kishan Negi

Romance

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Kishan Negi

Romance

साजन, लौट भी आओ

साजन, लौट भी आओ

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आसमां में चांद तारों से करके दिल की बातें

तुम बिन गुजारी हैं हमने सूनी-सूनी लंबी रातें

मगर तुमको मिलती नहीं फुर्सत उसके लिए

बिन जिसके अधूरी रहती थी हसीन मुलाकातें 


दर्द भी सिमट कर रह गए वक़्त की सलवटों में 

सच बहुत याद आते हो तुम हर रात करवटों में

आंखों की सरहदों को लांघकर नींद गायब थी

कमबख्त टहल रही थी हिमालय की तलहटों में


ज़ालिम ज़माना भी अब नज़र भर के देखता है

मनचला भंवरा कली को आहें भर के देखता है

हाल तुम्हारा जानने घर की मुंडेर पर हर रात

बिन बुलाए सन्नाटा भी अक्सर ठहर के देखता है


अच्छा ये तो बताओ याद हमारी आती तो होगी

जो ख़त भेजा था उस पर कभी नज़र जाती तो होगी

रात की तन्हाईयों में सिमटकर बेकरार चांदनी 

मुस्कुराके गीत पिया मिलन के आज भी गाती तो होगी


कभी सोचा है हमारे बीच ये दूरियाँ क्यों बढ़ रही हैं

जख्मों के घायल पन्नों को कुरेदकर दर्द पढ़ रही हैं

आसूंओं की सौगंध पास मेरे अब लौट भी आओ

आंखों से फिसलकर बेचैनियाँ अब सर पर चढ़ रही हैं।



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