STORYMIRROR

प्रियंका शर्मा

Abstract

3  

प्रियंका शर्मा

Abstract

सागर से अंजुरी तक

सागर से अंजुरी तक

1 min
323

किस काम के हैं ये

सारे सागर

जो सदा प्यासे ही रहते हैं,

अथाह जलनिधि के स्वामी होते हुए भी

इनसे अच्छा तो है वो पनघट भी

जो कर देता है बाल्टी लबालब

वो बाल्टी जो बुझा देती है

धरा की प्यास भी

अपने छलकने भर से ही

और वो अंजुरी जो

टपका देती है कुछ बूँदे

उँगलियों के मध्य से ही।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract