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priyanka sharma

Others


3.0  

priyanka sharma

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कुछ पुरानी उधड़न

कुछ पुरानी उधड़न

1 min 112 1 min 112

बना रही थी

उधड़े स्वेटर की ऊन

का एक गोला

और सोचती जा रही थी मैं

कि होती है किसी हद तक ऐसी ही

प्रकृति एक नारी की भी


बैठती है जब भी नितान्त

और कुछ मुक्ति पलों में

देती है वो भी अपने दुखों को

एक नया आकार

ठीक इसी वलय की भाँति

बस इसी सोच में

हो गया है एक गोला पूरा


रख इसे एक तरफ

बढ़ चले हैं हाथ अब

दूसरा गोला बनाने

बच जो रही है अभी

कुछ पुरानी उधड़न



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