STORYMIRROR

Acharya Neeru Sharma(Pahadan)

Classics

4  

Acharya Neeru Sharma(Pahadan)

Classics

सादगी और सियासत

सादगी और सियासत

1 min
381

सादगी जो जन्म से पाई है इसलिए 

सादगी और ईमानदारी का शौक रखते हैं हम 


अंधेरों से भी प्रेम करते हैं क्योंकि इन्होंने तो 

अपने - पराए कैसे होते हैं इसका आईना दिखलाया है 


कुछ जो बनते थे अपना , जब से 

हमने देखा उनका सियासी अंदाज़ 


हमने भी निगाहें ही कटार सी रख लीं  

तबसे सियासत वाले भी हमसे नज़रें चुराकर 


पड़ोस से ऐसे निकलते हैं कि कहीं 

सच्चाई और ईमानदारी से नज़रें जो मिलीं उनकी 

तो भेद उनका कहीं खुल न जाए। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics