रोज़ प्यार करने वाला
रोज़ प्यार करने वाला
उन्हें एक दिन तय करना पड़ा,
कि आज प्यार खूब फलेगा,
सारा का सारा, एक गुलाब,
चॉकलेट या अंगूठी में सिमटेगा।
उनका दिल तो दरअसल,
दिमाग के कहने से चलता है,
यहाँ तो ये प्यार के मायने,
समझे बिना ही धड़कता है।
रूहानी आशिकी, शायर की
कलम से है आगे की चीज़,
महबूब का वक़्त मिले न मिले,
मसरूफ ही रहता है ये नाचीज़।।

