रोटी
रोटी
दाल रोटी ही खायी बासी है
इसलिए जिंदगी रूंआसी है
चटनी रोटी बासी है घर में तो
इसलिए होंठों पे उदासी है
दिल दुखाया नहीं किसी का भी
क्यों ख़ुशी जीस्त से ख़फ़ा सी है
नफ़रतों ने रोका रास्ता ऐसा
प्यार की राहे जुदा सी है
किस तरह मैं करूं यक़ी उसपे
उसकी हर बातें में सिहासी है
ए ख़ुदा तू मिला उसी से ही
एक तस्वीर जो तराशी है
नफ़रतें देख ली बहुत "आज़म"
प्यार की रोज़ जीस्त प्यासी है
