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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

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बूंद

बूंद

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बूंद बूंद से 

घड़ा भर जाए

इक इक बूँद का महत्व बड़ा है

इक बूंद जो गिरे पत्ते पर

शबनम बन मन को लुभाए

इक बूंद जो गिरे सीप में

बहुमूल्य मोती बन जाए

इक बूंद जो गिरे धरती पर

मिट्टी में समा वृक्ष को हरा भरा बनाए। 


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