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Mayank Kumar 'Singh'

Romance

5.0  

Mayank Kumar 'Singh'

Romance

रोज घबराया

रोज घबराया

1 min
306


रोज घबरा

फिर तुझे पाया

मुश्किल था रोना

पर तू ने रुलाया

हास्य बना जीवन

पर,

कल्पना ने संभाला

मेरी छोटी सी कल्पना में

तेरा था छाया।


हाय रे !

पीतांबर क्या तूने कर डाला ?

अपने हाथों से

अपार दुख दे डाला !

पर जो भी था अच्छा था

इससे तुमसे जुड़ा रहा .......!


इसलिए आस है

इसलिए खास है

कभी तो उत्साह है

लेकिन ,

फिर भी

जीवन अपने में हास्य है।


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