Dr.Beena Agrawal
Fantasy Inspirational Children
सावन का महीना,
वर्षा की फुहार
आया राखी का त्यौहार।
एक डोर से बंधा,
यह बंधन रिश्तो का।
जीवन की डगर में,
बीज से पेड़ के ओर
अभिसिंचित हुआ
प्यार से भरपूर
खून से निर्मित,
धागा प्रेम का
कभी ना टूटेगा
भाई बहन के रिश्ते
का अनोखा बंधन।
एक पल
सृष्टि
धरती
रिश्ता
कर्फ्यू के 21...
आती है तकिये पर हर रात चुलबुली, शोख़ सी अपनी तमाम बातें लेकर पढ़ने को मेरी ख़ामोशी आती है तकिये पर हर रात चुलबुली, शोख़ सी अपनी तमाम बातें लेकर पढ़ने को म...
आह ! हृदय विदारक चीख मेरे होठों से फूट पड़ी ! आह ! हृदय विदारक चीख मेरे होठों से फूट पड़ी !
यहाँ सब लोग हँसते है यहाँ सब लोग हँसते है
प्यार होकर भी जता नहीं पाते प्यार होकर भी जता नहीं पाते
इस स्वप्निल संसार का...न आदि न अंत। इस स्वप्निल संसार का...न आदि न अंत।
प्रेम अलंकृत तुम से ही है प्रेम अलंकृत तुम से ही है
अच्छा लगता है तुम्हारा होना अच्छा लगता है तुम्हारा होना
अकेले ही जीता रेह, और अकेले ही लौट जाना। अकेले ही जीता रेह, और अकेले ही लौट जाना।
एक अरसा बीत गया, दम भर कर मुस्कुराये हुए। एक अरसा बीत गया, दम भर कर मुस्कुराये हुए।
मैं उठी सहमकर पलकें झपकायी, फिर गुनगुनायी उसे देखकर मैं उठी सहमकर पलकें झपकायी, फिर गुनगुनायी उसे देखकर
मर्यादा की बेड़ियों में, अब ना कहो कुढ़ने को। तोड़ कर ये बेड़ियाँ, आसमान से जुड़ने दो। मर्यादा की बेड़ियों में, अब ना कहो कुढ़ने को। तोड़ कर ये बेड़ियाँ, आसमान से...
मुझे डर है कहीं रो न दूँ ज़ार ज़ार मुझे डर है कहीं रो न दूँ ज़ार ज़ार
स्वेच्छा को साकार जो कर दे, बनना ऐसे तुम विरले। स्वेच्छा को साकार जो कर दे, बनना ऐसे तुम विरले।
जहां पहुंचने का ख्याल भी न आया हो किसी को हाँ मैं ऐसी ही किसी जगह जाना चाहता हूँ। जहां पहुंचने का ख्याल भी न आया हो किसी को हाँ मैं ऐसी ही किसी जगह जाना चाहता...
डाइरी के बचे हुए पन्ने डाइरी के बचे हुए पन्ने
छूटा वक्त फिर से न रुबरु हो जाए, दराजों में सहेजें लम्हें न बिखर न जाए। छूटा वक्त फिर से न रुबरु हो जाए, दराजों में सहेजें लम्हें न बिखर न जाए।
रख लेती हूँ तुम्हें हथेली पर शबनम बन शरमाती क्यों है छोड़ चलूँ मैं तुमको जब आवाज़ देकर रख लेती हूँ तुम्हें हथेली पर शबनम बन शरमाती क्यों है छोड़ चलूँ मैं तुमको जब...
हम उसके लौटआने का इन्तज़ार करते है हम उसके लौटआने का इन्तज़ार करते है
ना खींच के हाथ उसका छल से तोड़ पाएगा लक्ष्मण रेखा का घेरा ना खींच के हाथ उसका छल से तोड़ पाएगा लक्ष्मण रेखा का घेरा
आसमान की ऊँचाइयों को छूना है उसका हुनर आसमान की ऊँचाइयों को छूना है उसका हुनर