STORYMIRROR

Amruta Thakar

Tragedy

2  

Amruta Thakar

Tragedy

रिक्तता

रिक्तता

1 min
58

शायद रिक्तता ही ज़िन्दगी है

तेरे चुनाव में फिर से हम हारे हैं

तेरी सलामती तेरी दुनिया जगमगाए

रुखसत हम कर जाते हैं

माना के अब वो भरोसा या वो रिश्ता बेनाम सा अब नहीं लौटेगा.

पर ए मुझसे जुदा होके तु मेरे जज़्बात भी खींच ले गया है

कितनी भी कोशिश कर ले तेरे हर एक पल में भर जाएंगे ये जज़्बात यादों के कितने रंग बनके!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy