रिक्त हूँ
रिक्त हूँ
एक-दूसरे में खुद को चलो बो दें यूँ उखाड़ न पाए ज़माना,
बूँद-बूँद मैं तुझ में बसूँ मेरा ज़र्रा-ज़र्रा तू बन जा।
ओढूँ मैं काया तेरी, मेरी त्वचा पर खुद को मल जा,
सांध्यगीत सी बहू मैं जब-जब सुर तू मेरा बना जा।
भोर की सुंदर पहली किरण बन झाँकूँ तेरे आँगन,
मैं तेरे जीवन का नूर तू रश्मि रथी सा बन जा।
हर दिशा को भर दूँ तेरी खुशियों की सौगातों संग,
बदरी बनूँ मैं नीर भरी मौसम मतवाला बन जा।
यामा सी बन विचरूँ तेरी गलियों के सुंदर पथ पर,
चाँद सा तू चमकते मेरे जीवन की रौनक बन जा।
रूह की सतह से तुझको चाहूँ, तू चाहत मेरी बन जा,
नदियाँ सी मैं दौड़ी आऊँ तू दिल से दरिया बन जा।
सूखी शाख सी, बंजर धरा सी खाली गगरी बन भटकूँ,
रिक्त हूँ मैं रिक्त भीतर से पूर्णता तू बन जा।

