STORYMIRROR

Shweta Chaturvedi

Romance

3  

Shweta Chaturvedi

Romance

इक अधूरी हक़ीक़त

इक अधूरी हक़ीक़त

1 min
205

इक अधूरी हक़ीक़त की तरह 

अधूरा सा झिलमिलाता आता है


चाँद रौशन भी मुझे,

आज बोझिल सा नज़र आता है


करे कोई क़ैद जिस्म की दीवार में 

चाँद का पाँव, आसमाँ पे फिसल जाता है,


रात पूनम को इश्क़ में पूरा हो कर 

चाँद निर्मोही सा इंतज़ारमें जलाता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance