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Devkaran Gandas

Romance

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Devkaran Gandas

Romance

रीस मत कर गोरडी

रीस मत कर गोरडी

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रीस मत कर गोरडी, आ रीस रूप ने खाय,

काया को कचरो हुवे, मन में कुबुद्धि जाय।

रीस म कर स्यूं पीवजी, रीस म्हारो हथियार 

मना सको तो मनाय लो, काठो राखो प्यार।


रीस स्यूं कुण के पायो है, रीस मना कर नार

लोग लड़ासी ओर घणा, करसी दो का च्यार।

कुणसा घर में पीवजी, आ भली केईजी नार

जूती निच राखी है म्हान, म्हान दबाई हरबार।


गलती म्हारी होयगी, तू माफ़ भी कर दे यार,

तू जिया केसी मं मान स्यूं, मं मानण न त्यार।

थे क्यूं गलती मान रिया, गलत ही थारी नार

अब स्यूं राजी रेव स्या, आपा लुगाई मोट्यार।


रचयिता : देवकरण गंडास "देव"


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