जीत के सूरज के सब साथी
जीत के सूरज के सब साथी
गर न बोले तो घमंड बहुत है, बोले तो बातूनी है,
कौन ले रहा हर्ष हिलोरें, किसकी दुनिया सुनी है,
चेहरों से तौला जाता है इस दुनियां के बाज़ार में
जीत के सूरज के सब साथी, रहा अकेला हार में।
मैं किसी के काम न आऊँ, मेरे लिए सब खड़े रहें,
ऐसा तो मुमकिन ही नहीं कि जिंदा हों पर गड़े रहें,
आशा रखना बुरा नहीं, सब हासिल नहीं संसार में
सुख के दिन महलों में बीते, ग़म चादर तार तार में।
जीत के सूरज के सब साथी............................
कोई है मुश्किल में, तुम पूछो, साथ भले न दे पाओ,
बोली भी साहस देती है, बोल के अच्छा बन जाओ,
सब साथ रहें तो स्वर्ग यहीं है, क्या ही मिलेगा रार में
जो मन में कुंठा लिए रहोगे, नर्क मिलेगा घरबार में।
जीत के सूरज के सब साथी............................
सीता जैसी नारी चाहिए, ये राम चाहते भरतार में,
लेकिन वन में जाना नहीं है, महल चाहिए प्यार में,
करो यकीं अपनों पर यारों, शक से रहोगे दुश्वार में,
अपनों को तुम मीत बना लो, खुदा मिलेगा यार में।
जीत के सूरज के सब साथी............................
