रहस्य / राज़
रहस्य / राज़
संकेतों को माने कौन,
राज़ प्रकृति का जाने कौन।
तेल, गैस या मिट्टी पत्थर,
रोज निकालते हैं जी भर।
संसाधनों का दुगुना दोहन,
नगण्य हुआ है वृक्षारोपण ।
भू का बिगड़ गया संतुलन,
भूकम्प बढ़ाते हैं धड़कन ।
अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि,
आकुल व्याकुल समस्त सृष्टि।
मात प्रकृति का करो ख्याल,
वरना होंगे खस्ता हाल ।।
