रात
रात
तुम पूछती हो ना,
क्या करता हूँ मैं रातों को तन्हा जाग कर,
फ़िर मुस्कुरा देती हो, अपने सारे सवाल दाग कर,
एक ये रात ही तो मेरी अपनी है,
जो तुम्हें दूर नहीं होने देती मुझसे,
भुला देता हूँ मैं बाकी सारे रिश्तों को,
पिरो देता हूँ तेरी यादों को शब्दों में,
हाँ जब नहीं संभाल पाता हूँ खुद को,
तो रो लेता हूं कुछ देर,
जब याद आती है तुम्हारी,
तो सुन लेता हूँ फिर वही गीत जो या तो तुमने सुझाये थे,
या साथ तुम्हारे मैंने गुनगुनाये थे,
याद कर लेता हूँ मैं सारे हसीं पल,
जो साथ मेरे तुमने बिताये थे,
वो सारी बातें, वो सारे किस्से,
वो उन दिनों के कुछ बेहतरीन हिस्से,
वो सारे सफ़र, वो सारी मंजिलें ,
वो सारे जवाब, वो सारी मुश्किलें,
मोहब्बत का अनकहा अहसास हो तुम,
एक रात ही तो होती है,
जब मैं सबसे दूर, और मेरे सबसे पास हो तुम...!!!

